तेरी जवां हुस्ऩ पे….

तेरी जवां हुस्ऩ पे थोड़ा मर लूँ क्या, तेरी रज़ा हो तुझे जी लूँ क्या,
जबसे तेरी आँखों को देखा हूँ,उनकी झरफ़ में उतरने लगा हूँ।

मैं ग़म का मारा था कभी, अब तो छुप-छुपकर हँसने लगा हूँ,
यूँ नई सुबह तुम बनकर आए, मैं सुकूँ से हरपल रहने लगा हूँ।

जो कुछ भी दर्द थे, जो भी बेचैनी, उन्हें दिल में दफ़न किया हूँ,
तेरे रसभरे होठों पे रखके होंठ, मैं इत्मिऩान से उनको पी लूँ क्या!

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तुम्हें तस्वीर में…

तुम्हें तस्वीर में देखने से मन नहीं भरता, काश कि तुम मेरे तकदीर में होते,
तुम जिंदगी में होते, तुम्ही जिंदगी होते, तुम्ही हाथों की लकीर में होते।

मीरे-ग़जल….

मीरे-ग़ज़ल अर्ज़ करूँ आपकी तारीफ़ में, आपकी खिदमत़ में जान पलके बिछा दूँ,
तशरीफ़ तो रखिए जरा मेरे दिल के मकां में, आपकी खातिर कसम से जान लुटा दूँ!

मीर सुख़न के ख़ुदा थे, आप हुस्न की ख़ुदा हो, आपकी हर इक अदा पे कोई शेर सुना दूँ,
तेरे नूर में ढलकर चमक लूँ मैं चाँद सा, तेरी झील सी आँखों में मेरी किश्ती डुबा दूँ!

टूट गये हैं….

टूट गये हैं वो मुहब्बत के धागे, जो हमने थे इक रोज़ बाँधे,
तुम हो गये थे जब से जुदा, दिल में रह गई बस तेरी यादें-(×२)

जाना ही था तो क्युं पास आए, क्युं पास आकर सपने दिखाए,
हम बेसबर थे ग़र जाने-जां तो, क्युं आप खुद को थाम न पाए??

माना कि कुछ ख़ता हम किए, कुछ तो कुसूरवार है तेरी आँखें,
टूट गये हैं वो मुहब्बत के धागे, जो हमने थे इक रोज़ बाँधे….!!