रोज सेहर-ओ-शाम…

रोज सेहर-ओ-शाम तेरा दिदार करता हूँ, फिर भी ये दिल भरने को राज़ी ही नहीं,
ग़ज़लें लिखने के बाद खुद से पूछता हूँ, कहीं मैं गालिब़ या कैफ़ी आज़मी तो नहीं??

Advertisements

यूँ बेलिहाज़….

यूँ बेलिहाज़ जवानी को जरा तुम तो संभालो, रुख़सार पे जरा तुम पर्दा गिरा लो!
ख़ुद की नजरों से तुम खुद को बचा लो, अज़ी आईना ना देखो तुम उसको छुपा लो!

ऐसे नाओनोश….

ऐसे नाओनोश गर्दिश में, आखिर अहजाऩ क्या है रोशन,
किस चीज की तलब़ है, बोलो ना अरमान क्या है रोशन,

जिंदा-दिल हो अगर तुम, तो जिंदा क्युं नहीं लग रहे तुम,
इश्क़ करके लौटे हो, अब दिखाओ ईनाम क्या है रोशन!

छू लिया मेरे….

छू लिया मेरे जिस्त़ को ग़मों ने कैसे, आखिर किसने इन ग़मों को पता दे दिया,
कुसूर हमने भी किया है, जो ख़ुश-मिजाज़ थे, जाके महफ़िल में मुस्कुरा दिया।

मैं मुझमें नहीं हूँ….

मैं मुझमें नहीं हूँ ये इत्तेफ़ाक है यारों, मैं गुम हूँ कुछ तो बात है यारों,
हर किसी के दिल में बेशक सेहर हो, मेरे दिल में सिर्फ़ रात है यारों!

कोई जाकर उनसे हाले-दिल कह दे, मैं तड़पूँ बदतर हालात है यारों,
हर तरफ़ तन्हाई व बेक़सी है, ऐसा लगता है ग़म की बारात है यारों!

तेरी आँखों के दरिये….

तेरी आँखों के दरिये में मुझको साहिल मिल जाए,
मैं जब-जब तुझको देखूँ तो ये दिल क्युं थम जाए,

रह-रहकर बुझ जाए दीपक, रह-रहकर जल जाए,
ये कैसी आँधियां है तुझमें कि मेरे अरमां बह जाए!